ऑटो, विक्रम और टैक्सी का टैक्स आरटीओ में नहीं होगा जमा

आरटीओ दफ्तर में अब ठेका परमिट वाले वाहनों का टैक्स जमा नहीं होगा। विभाग ने बुधवार से दफ्तर में टैक्स जमा करना बंद कर दिया है। वाहन स्वामियों को अब खुद या फिर साइबर कैफे में जाकर ऑनलाइन टैक्स जमा करवाना होगा। वहीं, साइबर कैफे संचालकों ने मनमानी शुरू कर दी है।  देहरादून आरटीओ दफ्तर में करीब 40 हजार ठेका परमिट वाले वाहन पंजीकृत है। इसमें 2394 ऑटो, 974 विक्रम समेत बस, टैक्सी, मैक्सी, मैजिक, ट्रक शामिल हैं। ऑनलाइन टैक्स जमा करने की सुविधा पहले से थी, लेकिन ऑनलाइन टैक्स जमा करने की जानकारी नहीं होने और ऑनलाइन सेंटरों की मनमानी के चलते 80 प्रतिशत वाहन स्वामी अभी भी आरटीओ दफ्तर आकर टैक्स जमा करवाते थे, लेकिन बुधवार से विभाग ने दफ्तर में टैक्स जमा करना बंद कर दिया है। अब वाहन स्वामियों को बाहर से ऑनलाइन टैक्स जमा करवाना होगा। आरटीओ दफ्तर में कई लोग टैक्स जमा करवाने पहुंचे, लेकिन उनको बैरंग वापस लौटना पड़ा। जब से आरटीओ दफ्तर में विजिलेंस का छापा पड़ा है तब से विभाग में सभी कामों में पारदर्शिता लाने के लिए बदलाव किए जा रहे हैं। विजिलेंस ने दफ्तर में एक बाबू और दो दलालों को घूस लेते हुए पकड़ा था।


वाहन डीलरों की मनमानी के चलते वाहनों के रजिस्ट्रेशन समय पर नहीं हो रहे हैं। पंजीकरण करवाने के लिए लोगों को डीलर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। नियमानुसार वाहन खरीदने के एक सप्ताह बाद पंजीकरण होना जरूरी है। इसके बाद रोजाना 100 रुपये पेनाल्टी का प्रावधान है, लेकिन नियमों की सख्ती के चलते डीलर समय पर आरटीओ दफ्तर फाइल नहीं भेज पा रहे हैं, जो भेज रहे हैं, वह आधा-अधूरी फाइल भेज रहे हैं, जिस कारण फाइल वापस लौटाई जा रही है। एआरटीओ द्वारिका प्रसाद ने बताया कि 28 नंवबर से नया नियम लागू हुआ है। इसमें डीलर को वाहन खरीद के सभी डाक्यूमेंट ऑनलाइन बेवसाइट पर अपलोड करने के बाद फाइल आरटीओ भेजनी होगी, लेकिन अधिकांश डीलर डाक्यूमेंट अपलोड किए बगैर फाइल भेज रहे हैं।